मनीष शुक्ल 'मनी'

मनीष शुक्ल 'मनी'

Tuesday, November 30, 2010

ऐ अजनबी तेरे आने का "शुक्रिया "

ऐ अजनबी तेरे आने का "शुक्रिया "
इस रूठे हुए को मानाने का"शुक्रिया "

आवारगी से नवाजा है जमाने ने इसे
तेरा इस से दिल लगाने का "शुक्रिया "

बड़ी खामोश है जिन्दगी इसकी
संग इसके मुस्कुराने का "शुक्रिया "

घर होते हुए भी बेघर रहा
इसके संग घर बसाने का "शुक्रिया "

"मनी" समझ होके भी न समझे लोग
तेरा इसको समझ जाने का "शुक्रिया "

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