मनीष शुक्ल 'मनी'

मनीष शुक्ल 'मनी'

Saturday, December 4, 2010

आज मैखाने की तरफ होके आते है, एक पैमाना और एक जाम बनाते है

आज मैखाने की तरफ होके आते है 
एक पैमाना और एक जाम बनाते है

गम और ख़ुशी का एक माजरा बनाते है
आज मैखाने में खूब झूम के गाते है

चाहत को हकीकत से रु बरु करते है
आज मैखाने को दिल से सजाते है

खूब पीते है और खूब पिलाते है
आज मैखाने से लडखडा के जाते है

परवाह न खुद की न रह्गुजारी की
आज मैखाने में खुद ही बिक जाते है

........मनीष शुक्ल

No comments:

Post a Comment