मनीष शुक्ल 'मनी'

मनीष शुक्ल 'मनी'

Thursday, December 1, 2011

यू तो सबको अच्छे लगने लगे हों पर 'कोई नहीं खासकर ये लाल रंग पहन कर न आया करो तुम


धीरे से आराम से खिड़की से मुस्कुराया करो तुम 
नजर लग जाएगी यूही  टहलने न जाया करो तुम 

यू तो सबको अच्छे लगने लगे हों पर 'कोई नहीं 
खासकर ये लाल रंग पहन कर न आया करो तुम 

लाजवाब' अदाए है पास तुम्हारे सच है ये 
पर हस्ते हुए यू ज़ुल्फ़ न लहराया करो तुम  

      मस्त बिंदास ,रहती हों वाकई गज़ब है 
  पर  औरो की तरह भाव न खाया करो तुम 

सच है सभी कहते की बहुत  खूबसूरत लड़की हों तुम 
मनी' पर घंटा घंटा आईने को युही न निहारा करो तुम 
                                   ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष शुक्ल 

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