धीरे से आराम से खिड़की से मुस्कुराया करो तुम नजर लग जाएगी यूही टहलने न जाया करो तुम
यू तो सबको अच्छे लगने लगे हों पर 'कोई नहीं
खासकर ये लाल रंग पहन कर न आया करो तुम
लाजवाब' अदाए है पास तुम्हारे सच है ये
पर हस्ते हुए यू ज़ुल्फ़ न लहराया करो तुम
मस्त बिंदास ,रहती हों वाकई गज़ब है
पर औरो की तरह भाव न खाया करो तुम
सच है सभी कहते की बहुत खूबसूरत लड़की हों तुम
मनी' पर घंटा घंटा आईने को युही न निहारा करो तुम
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष शुक्ल
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