मनीष शुक्ल 'मनी'

मनीष शुक्ल 'मनी'

Wednesday, April 6, 2011

थकन टूटन अजब सी बेचैनी

थकन टूटन अजब सी बेचैनी
तेरे आने से इतना दर्द क्यों है ,,,fever,,,

Tuesday, January 25, 2011

सबसे प्यारा वतन हमारा जो है सबसे न्यारा न्यारा .......


. सबसे प्यारा वतन हमारा जो है सबसे न्यारा न्यारा .......




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सबसे प्यारा वतन हमारा 
जो है सबसे न्यारा न्यारा
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राम कृष्ण महापुरुसो को भी ये है सबसे प्यारा 
रामायण गीता पुराण का नही यहा  बटवारा 
गंगा यमुना सरस्वती भारत प्रतीक कहलाते 
हम उस देस के रहने वाले व्हा कि बात बताते
चंदशेखर आजाद भगत सिंघ  ने दे दि जान यहां पर  
उनको कर सत सत प्रणाम उनके दीप जलाये यहा पर
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सबसे प्यारा वतन हमारा 
जो है सबसे न्यारा न्यारा 
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बच्चो को प्यार बडो को आदर बुजुर्गो का सम्मान यहा पर
हम सब बच्चो को मिले ये सारे संस्कार यहा  पर
कल्पना चावला शेवता ने अंतरीक्ष  मे शान बढआइ है 
रानी लक्ष्मी बाई चेन्न्मा देश कि खातीर अपनी जान गवाई है 
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ताज महल है प्रेम प्रतीक 
और लाल किला है वीरो का घर है 
देश कि चोटी यहा हिमालय जिसका सागर पग धोता है
काश्मीर है स्वर्ग हमारा जिस पर गर्व सभी को होता है 
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सबसे प्यारा वतन हमारा 
जो है सबसे न्यारा न्यारा 
...............मनीष शुक्ला   

Monday, January 10, 2011

तू ठहर के देख जरा दो पल,,,,,,,,

जहा तू है तेरी वफ़ा है तेरी जवानी भी है
उन गलियों में ज़िन्दा मेरी कहानी भी है

तू ठहर के देख जरा दो पल वहा
ठहरी हुई अपनी निशानी भी है

तू किस गम में है ये बतलादे मुझे
देख तेरे पीछे मेरी जिंदगानी भी है

ये तेरी वफ़ा है जो ज़िन्दा हू मै
देख तेरी ऐसी मेहेरवानी भी है

'मनी'आज हालातो में बहुत उलझा हू
क्यों संग अपने ऐसी कहानी भी है
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष शुक्ल

Tuesday, January 4, 2011

मै भला हू या बुरा रहने दो ,,,,,,,,,

मै भला हू या बुरा रहने दो 
मै जैसा हू वैसा बना रहने दो 

मुझको दिए है तुने  तोहफे बहुत 
मै  भूला हू  वो सब भूला रहने दो 

शराफत है कितनी तुझमे पता है 
बस एक पर्दा है पड़ा रहने दो

अब   दर्द में आवाज़ मत दो मुझे
बेवफा बोला था न बेवफा रहने दो 

'मनी' आजकल बहुत हँसता  हू मै 
दूर रखो  खुदको मुझे जुदा रहने दो 
                  ........मनीष शुक्ल 
 

Saturday, January 1, 2011

नव वर्ष मुबारक ,नव वर्ष मुबारक,,,,,

नव वर्ष मुबारक ,नव वर्ष मुबारक,,,,

2 टिप्पणी


ये सुबह मुबारक ये शाम मुबारक
तू मुबारक तेरा ईमान मुबारक
'मनी' देता है दिलो जान से मुबारक
नव वर्ष मुबारक ,नव वर्ष मुबारक,,,,,,,,मनीष शुक्ल

Wednesday, December 15, 2010

तुम ऐसे न खुद को चुराया करो , कभी सामने आ भी जाया करो

तुम ऐसे न खुद को चुराया करो
कभी सामने आ भी जाया करो

मै देखने के लिए बैठा हु देखो
कभी तो नजरे मिलाया करो

मै जगता हु सारी राते यहाँ पर
कभी खाव्बो में भी आया करो

बहुत उदास हू आज कल
कभी हँसा भी जाया करो

अब तो लोग कहने लगे है दीवाना
कभी खुद भी हिम्मत दिखाया करो

अब इतना न यु सताया करो
कभी तो दिल से लगाया करो
................मनीष शुक्ल

Tuesday, December 14, 2010

तू भी नहीं अब तेरा एहसास भी


तू भी नहीं अब तेरा एहसास भी नहीं
उगते हुए सूरज को तेरी आस भी नहीं

दोस्ती कि कितनी झूठी दुहाई दोगे' के
अब दोस्ती के तू आस पास भी नहीं

कितनो को दोस्त कहके तू ने यहाँ लूटा 'कि
अब रहा किसी का तुझ पर विश्वास भी नहीं

कब तक गिनाते रहोगे वो एक एहसान अपना'कि
'मनी'इनको होगा कभी इसका एहसास भी नहीं

तू भी नहीं अब तेरा एहसास भी नहीं
गते हुए सूरज को तेरी आस भी नहीं
'''''''''''''''''''''''मनीष शुक्ल